शुक्रवार, 27 जून 2025

मेरा देश बदल रहा है......

 


मेरा देश बदल रहा है......

   2 अक्तूबर गांधी जयंती स्वच्छता दिवस.........

आज सुबह आगरा से दिल्ली जाने के लिए निकला। स्टेशन पहुंच, प्लेटफॉर्म पर आया और गाड़ी का इंतज़ार करने लगा।

जहां बैठा था ठीक उसी के सामने प्लेटफॉर्म पर बहुत सारा पानी जमा हो गया था, ठीक वहीं जहां यात्री डिब्बे से उतरता है। कुछ देर बाद एक ट्रेन आयी एक व्यक्ति खाने का कुछ सामान लेने के लिए नीचे उतरा, उसे कुछ विलंब हो गया इतने में ट्रेन बढ़ चली, वह अपने डिब्बे की ओर लपका और ज्यों ही उसका पैर पानी में पड़ा वह लड़खड़ा गया, ईश्वर की कृपा से गिरा नहीं अन्यथा बड़ी दुर्घटना हो जाती।

बहुत दुख हुआ कि आज स्वच्छता दिवस है और यह स्थिति है। फिर ध्यान आया, क्यों न रेल्वे की ऑनलाइन 'रेल मदद' सुविधा का उपयोग किया जाए! वेबसाईट पर गया अपनी जानकारी भरी और उस जगह का फोटो अपलोड किया जहां प्लेटफार्म पर पानी जमा था। तुरंत संदेश आया आपकी शिकायत दर्ज़ हो गई है।

पांच मिनट के बाद उनके नेशनल सेंटर से फोन आया, शिकायत की मौखिक जानकारी पूछी गई,मैंने पुष्टि की। अगले पांच मिनट बाद जहां मैं बैठा था उस स्टेशन के मैनेजर का फोन आया उन्होंने भी शिकायत की मौखिक जानकारी ली और कहा कुछ ही देर में उस स्थान की सफ़ाई हो जाएगी जहां पानी जमा है, और असुविधा के लिए दुख व्यक्त किया।

तभी मेरी ट्रेन आ गई और मैं ट्रेन में बैठ अपने गंतव्य की ओर निकला ही था कि फोन फिर बज उठा। उन्हीं मैनेजर साहब का फोन था कहा सफ़ाई हो चुकी है और उनके पास सफाई के बाद के फोटो भी आ चुके हैं, यदि आप वहां हों तो एक बार तसल्ली कर लें। मैंने कहा मैं तो निकल चुका हूं लेकिन मुझे आप पर विश्वास है काम हो गया होगा, आपका बहुत धन्यवाद, कहकर बात ख़त्म हुई।

लेकिन बात यहां ख़त्म नहीं होती। सच बात यह है कि सकारात्मक बदलावों को खुले दिल से स्वीकारना चाहिए। जो अच्छा है उसे भी अच्छा कहा जाना चाहिए बिना किसी पूर्वाग्रह के।

मेरी ट्रेन 'राजधानी एक्सप्रेस' दिल्ली की ओर चली जा रही है, उसी दिल्ली की ओर जिस राजधानी के पहले वाले लाल फीते में जकड़े प्रशासनिक गलियारे अब मुक्त हो रहे हैं, सुलभ और सहज हो रहे हैं क्योंकि मेरा देश बदल रहा है.........

चलते चलते...

डॉ.पुरुषोत्तम पाटील

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